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aravind sanka rapido: Exclusive: कैसे शुरु हुआ देश का पहला ‘बाइक’ कैब सर्विस, अरविन्द सनका से जानें Rapido का सफर – exclusive conversation with rapido co-founder aravind sanka


Rapido देश की सबसे बड़ी ‘बाइक-कैब सर्विस’ देने वाली कंपनी है, जिसका नेटवर्क करीब 100 शहरों तक फैला हुआ है। साल 2015 में शुरू हुए इस प्लेटफॉर्म में करीब 1500 लोग काम करते हैं। Rapido के मुताबिक अब तक करीब 1.5 करोड़ ग्राहक इसकी सर्विस का इस्तेमाल कर चुके हैं। इसके अलावा 15 लाख रजिस्टर्ड कैप्टन्स (ड्राइवर पार्टनर) इससे जुड़े हैं। ऐसे में Rapido के सफर और इसकी प्लानिंग को लेकर हमने Rapido के को-फाउंडर अरविन्द सनका से EXCLUSIVE बातचीत की। ये रहे उस इंटरव्यू के कुछ अंश….

सवाल: देश में फोर-व्हीलर (चार-पहिया) सर्विस के मुकाबले टू-व्हीलर (दो-पहिया) सर्विस को कैसे देखते हैं आप?

अरविन्द: चार साल पहले जब हमने Rapido की शुरुआत की, तब हमें लगा कि 4-व्हीलर की सर्विस ज्यादा तर मेट्रो शहरों में उपलब्ध है। ऐसे में करीब 200 या 300 से ज्यादा शहरों में 4-व्हीलर टैक्सी नहीं चलती है या लोग उसका ज्यादा इस्तेमाल नहीं करते, क्योंकि वह ज्यादा तर भारतीयों के लिए सस्ता नहीं है। ऐसे में मेरे हिसाब से 2-व्हीलर सर्विस का इस्तेमाल ज्यादा लोग करेंगे, क्योंकि इसमें टाइम भी बचता है और पैसे भी।

सवाल: आपने टू-व्हीलर टैक्सी सर्विस की शुरुआत Tier I और Tier II शहरों से शुरू की, लेकिन अब जो आप कह रहे हैं उस हिसाब से आपको टू-व्हीलर टैक्सी की शुरुआत Tier III सिटी से शुरू करनी चाहिए थी।

अरविन्द: मेरे हिसाब से छोटे शहरों का मतलब गांव नहीं है। छोटे शहरों से हमारा मतलब उन शहरों से है जहां 10 लाख से ज्यादा लोगों की आबादी है जैसे जयपुर, कोटा, अजमेर, लुधियाना। हम अभी 100 शहरों में हैं, जिनमें 90 शहर Tier II कैटेगरी में हैं और बाकी, 10 मेट्रोपॉलिटन शहर हैं। ऐसे में हमारा पूरा ध्यान इन्हीं शहरों पर है। शुरुआती दौर में हमने टू-व्हीलर टैक्सी सर्विस को मेट्रों शहरों से शुरू किया था, लेकिन फिर हमने देखा कि छोटे शहरों में बहुत पोटेंशियल है। ऐसे में यह Tier I और Tier II का कॉम्बिनेशन है।

सवाल: आपने टू-व्हीलर टैक्सी सर्विस की शुरुआत मेट्रो शहरों से की, जहां पर ज्यादातर लोग 4-व्हीलर का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आपको नहीं लगता कि इस पूरे प्रोजेक्ट को मेट्रो शहर में शुरू करने के बजाए दूसरे शहरों से शुरू करना चाहिए था?

अरविन्द: हमारा कॉन्सेप्ट बिल्कुल नया है। दरअसल हम जब भी किसी नए प्रोडक्ट की शुरुआत करते हैं, तो उसके बारे में ग्राहकों को समझाने में समय लगता है। टीयर-1 शहरों में कैब सर्विस या एप्लीकेशन का इस्तेमाल ग्राहकों के लिए नया नहीं है, इसलिए हमने अपने ऑपरेशन्स को यहां से शुरू किया। हमने सबसे पहले ऐप बनाया, लोगों से फीडबैक लिया और फिर अपने प्रोजक्ट को आगे बढ़ाया।

सवाल: 4-व्हीलर कैब सर्विस पर मौसम का असर नहीं पड़ता है। लेकिन टू-व्हीलर सर्विस पर गर्मी, सर्दी और बारिश सबका असर पड़ता है। ऐसे में मौसम का आपके सर्विस और बिजनेस पर कितना असर पड़ता है?

अरविन्द: भारत में टू-व्हीलर्स की संख्या 4-व्हीलर की तुलना में चार गुना ज्यादा है। ऐसे में इन सभी मौसम में बाइक चलाना कोई नया नहीं है। मेरे अनुभव के हिसाब से 3 से 4 किलोमीटर के पिक और ड्रॉप में अगर 10 मिनट का समय लगता है, तो गर्मा या सर्दी में इतनी देर यात्रा करना कोई बड़ी बात नहीं है। वहीं, अगर बरसात के मौसम की बात करें, तो भारी बारिश होने पर पूरा भारत रुक जाता है। ऐसे में टू-व्हीलर और 4-व्हीलर का कोई फर्क नहीं पड़ता है। बारिश जब ज्यादा होती है, तब बिजनेस कम होता है। लेकिन अगर थोड़ी धूप और हल्की बारिश है तब इसका इतना असर नहीं पड़ता है। इसके अलावा दो या तीन महीने में 15 फीसदी से ज्यादा असर नहीं पड़ता है। भारत में इतने शहर हैं। अगर एक शहर में ज्यादा बारिश हुई तो दूसरे शहर में इतनी बारिश नहीं होगी। जैसे दक्षिण भारत में इतनी बारिश नहीं होती है। जबकि, पश्चिम में ज्यादा बारिश होती है। ऐसे में हर शहर अलग है। कुछ शहरों में कुछ महीनों के लिए थोड़ा कम व्यापार हो सकता है, लेकिन पूरे भारत में इसका बिल्कुल असर नहीं पड़ता है।

सवाल: अभी फ्यूल की कीमतें काफी ज्यादा हैं। कई जगहों पर पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये से भी ऊपर चली गई हैं। ऐसे में आपके बिजनेस पर इसका कितना असर पड़ रहा है?

अरविन्द: देखिए, फ्यूल की कीमतों के कारण हम भी कभी-कभी कीमतों में बदलाव करते हैं। ऐसे में ड्राइवर के पे-रोल और कस्टमर की प्राइसिंग पर थोड़ा असर पड़ता है, लेकिन इतना भी ज्यादा असर नहीं पड़ता है।

सवाल: मैं आपका प्लान देख रहा था, जहां आप 599 रुपये में 60 किलोमीटर या 6 घंटे की राइड दे रहे हैं। वहीं, इस समय कई इलेक्ट्रिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियां हैं, जो ग्राहकों से कह रही हैं कि वे 2000 या 3000 रुपये दें और तुरंत अपने घर इलेक्ट्रिक बाइक ले जाएं और 2 या 3 साल तक इतने रुपये हर महीने देने के बाद यह बाइक हमेशा के लिए उनकी हो जाएगी। ऐसे में ग्राहक एक दिन में 599 रुपये खर्च करने की जगह क्यों न इलेक्ट्रिक बाइक को किराए पर खरीद ले?

अरविन्द: देखिए, 500 रुपये का पैकेज कोई भी ग्राहक साल में एक या दो बार ही लेता है। हमारा जो मेजर बिजनेस है वह यह है कि अगर मुझे 5 किलोमीटर ऑफिस से घर जाना है या मेट्रो से घर जाना है, तो मैं इसका इस्तेमाल करूंगा। ऐसे में इतने सफर के लिए मुझे सिर्फ 40 से 50 रुपये ही देने होंगे। दिन में दो बार Rapido की सर्विस का इस्तेमाल किया तो मुझे 100 रुपये से ज्यादा नहीं देने होंगे। ऐसे में मैं नया गाड़ी क्यों ले रहा हूं? 2000 रुपये हर महीने तीन साल तक देना, जिसे आप बदल नहीं सकते वह ज्यादा फ्लैक्सिबल नहीं है।

सवाल: इलेक्टिक व्हीकल बनाने वाली कंपनियां अपने ग्राहकों से कह रही हैं कि अगर उन्हें बाइक नहीं खरीदनी है, तो अगले महीने से वे 2000 या 3000 रुपये का इंस्टॉलमेंट न दें और बाइक लौटा दें। मान लीजिए कि अगर मुझे केवल दो महीनों के लिए इलेक्ट्रिक बाइक चाहिए, तो मैं उसका इस्तेमाल कर सकता है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक बाइक पर चार्जिंग की कीमत भी कम आती है। ऐसे में आप उन लोगों को कैसे बताएंगे कि वो इलेक्ट्रिक बाइक को रेंट पर लेने की जगह आपके सर्विस का इस्तेमाल करें।

अरविन्द: सबसे पहले हमें यह समझना है की राइड-शेयरिंग क्यों होता है? इसमें सबसे बड़ा फायदा यह है कि मुझे गाड़ी को ड्राइव नहीं करना है, मुझे बस पीछे बैठना है। हर बार पैसे का नहीं होता है। कैब सर्विस में मुझे पार्किंग और चार्जिंग की चिंता नहीं करनी है। इसके अलावा अगर गाड़ी को कुछ हुआ तो मुझे कोई परेशानी नहीं। गाड़ी पंचर हो जाए तो मुझे परेशानी नहीं है। ऐसे में राइड शेयरिंग सबसे सस्ता और सुविधाजनक है। आपको गाड़ी और गाड़ी की EMI को लेकर भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसके अलावा अगर आप सप्ताह में दो बार घर से ऑफिस जा रहे हैं, तो आपको किराये पर गाड़ी खरीदने से अच्छा है कि राइड शेयरिंग की जाए।

सवाल: 4-व्हीलर टैक्सी सर्विस पर सुरक्षा का बहुत ध्यान दिया जाता है। ग्राहक सीधे बात कर सकता है और अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। बाइक सर्विस में आप महिलाओं की सुरक्षा को लेकर क्या कर रहे हैं?

अरविन्द: सेफ्टी के लिए हमने अपना सर्विस शुरू किया है। भारत में पहली बार Rapido ने एक बाइक राइड का इंश्योरेंस शुरू किया है। 10 सालों से कई कैब सर्विस देने वाली कंपनियां हैं, लेकिन उनमें से सभी इंश्योरेंस नहीं देती हैं। हमने सबसे पहले ड्राइवर और ग्राहकों को इंश्योरेंस देना शुरू किया। हम सिर्फ हॉस्पिटल तक ही नहीं बल्कि फर्स्ट एड देने तक भी पूरा रीइम्बस करते हैं। हम 100 फीसदी मेडिकल रीइम्बस देते हैं। हमने सबसे पहले हेलमेट को अनिवार्य किया है। अगर आपने कभी Rapido की सर्विस इस्तेमाल की हो, तो कैप्टन के पास दो हेलमेट होंगे। एक हेलमेट उसके लिए और एक हेलमेट आपके लिए होगा। हम सारे राइड का स्पीड मॉनिटर करते हैं। जब भी कोई 60 या 70 से ऊपर की रफ्तार पर ड्राइवर करता है, तो हम उसे वॉर्निंग देते हैं। कई बार हम उस पर फाइन भी लगाते हैं और खराब ड्राइविंग के लिए उसे हटा भी देते हैं। इसके अलावा सुरक्षित राइडिंग करने पर हम राइडर को इनाम भी देते हैं।

सवाल: महिलाओं की सुरक्षा के लिए आप क्या कर रहे हैं। अगर कोई महिला आपकी सर्विस का इस्तेमाल रात में करती है, तो आप उसे कैसे गैरंटी देते हैं कि वह सुरक्षित रहेगी?

अरविन्द: हमारे ड्राइवर को फीडबैक मिलती है। हर राइड के बाद ड्राइवर को अच्छा या बुरा फीडबैक मिलता है और उसके आधार पर उसे रेटिंग मिलती है। हम ग्राहकों को दिखाते हैं कि जिस ड्राइवर से वो सर्विस ले रहे हैं, उसे कैसी रेटिंग मिली है। हम ग्राहकों को दिखाते हैं कि ड्राइवर कितना अच्छा है और वे उस पर कितना भरोसा कर सकते हैं।

सवाल: अपने जो कैप्टन (ड्राइवर) होते हैं क्या आप उनका बैकग्राउंड चेक करते हैं?

अरविन्द: हां, पूरे डाक्यूमेंट्स, KYC, आधार, पेनकार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, व्हीकल रजिस्ट्रेशन को अपलोड करने के बाद उन्हें वेरीफाई किया जाता है। इसके बाद ही कोई हमारे प्लेटफॉर्म को ज्वाइन कर सकता है।

सवाल: Rapido में अभी केवल पुरुष ड्राइवर्स ही हैं या उनमें महिलाएं भी शामिल हैं?

अरविन्द: महिला राइडर्स हैं, लेकिन पुरुष राइडर्स की संख्या ज्यादा है। हमारे पास अलग से तीन पहिया वाहनों के लिए हंडीकैप्ड (विकलांग) राइडर्स हैं। ऐसे में हम उम्र और जेंडर (लिंग) को लेकर अंतर नहीं करते। जिसे पैसा कमाना है और जिसे टू-व्हीलर चलाने आता है वह कैप्टन बन सकता है।

सवाल: इस पूरे प्रोजेक्ट पर अपने कितना निवेश किया है ओर आप आगे कितना निवेश करने का सोच रहे हैं?

अरविन्द: हमने पिछले 5 सालों में करीब 600 करोड़ रुपये का निवेश किया है। फ्यूचर फंडिंग का हम आगे बताएंगे अगर कोई न्यूज हुई तो। अभी बिजनेस चलाने के लिए हमारे पास पर्याप्त पैसा है।

सवाल: क्या आप अपने ड्राइवरों से उनका फीडबैक लेते हैं? जैसे कई कैब कंपनियों ने शुरू में अपने ड्राइवरों को अच्छा पैसा और रीइम्बस दिया, लेकिन अब उतना इंसेंटिव नहीं मिलता है। ऐसे में आप अपने ड्राइवरों को कैसी सुविधा दे रहे हैं?

अरविन्द: इसमें कई चीजें हैं। जैसे कि इंसेंटिव इसलिए दिया जाता है, क्योंकि बिना इसके ड्राइवर की पर्याप्त कमाई नहीं हो पाती है। ड्राइवर की आय बढ़ाने के लिए उन्हें इंसेंटिव दिया जाता है। लेकिन हम अपने बिजनेस में बाइक टैक्सी के अलावा लॉजिस्टिक भी रखते हैं। ऐसे में ज्यादा तर ड्राइवरों की कमाई लॉजिस्टिक के जरिए हो जाती है, लेकिन फ्यूल की कीमतों के बढ़ने या ड्राइवर की पर्याप्त कमाई नहीं होने पर हम उन्हें इसेंटिव देते हैं। ज्यादा तर मौकों पर हम यह पूरी कोशिश करते हैं कि ड्राइवर की पर्याप्त कमाई हो। हम यह देखते हैं कि कहीं हम OLA और UBER जैसी गलती तो नहीं कर रहे, जहां पहले ड्राइवर को ज्यादा इंसेंटिव दिया गया और बाद में सब खत्म कर दिया गया।

सवाल: क्या आप कालेज इंटर्नशिप जैसा आगे कुछ सोच रहे हैं? जैसे कोई स्टूडेंट है ओर वो समर या विंटर इंटर्नशिप के तौर पर कैप्टन बनना चाहे।

अरविन्द: हां, 80 साल से नीचे कोई भी व्यक्ति जिसके पास ड्राइविंग लाइसेंस हो वो कैप्टन बन सकता है। हम स्टूडेंट या मैरीड (शादीशुदा) में कोई भी अंतर नहीं करते।

सवाल: साल 2015 में आपने अपने 2 दोस्तों के साथ मिल कर Rapido की शुरुआत की। उस समय आपके दिमाग में क्या था? आपने इस पूरे प्रोजेक्ट को क्यों और कैसे शुरू किया? क्या थीम था आपका?

अरविन्द: हमने IIT से पढ़ाई की। उसके बाद सैमसंग और फ्लिपकार्ट में नौकरी की, लेकिन हमें लगा कि हम ज्यादा कर सकते हैं और लोगों को इम्पैक्ट कर सकते हैं। हमारा मकसद एक है कि ज्यादा से ज्यादा सोसाइटी के लिए हम क्या कर सकते हैं। हमने सबसे पहले एक स्टार्टअप शुरू किया था लेकिन वह चला नहीं। इसके बाद हमने Rapido शुरू किया। हमारे पास अच्छा नेटवर्क था। हमने अच्छी पढ़ाई की थी। लेकिन फिर हमने यह सोचा कि हम कोई भी नौकरी कर सकते हैं लेकिन उसमें हमें संतुष्टी नहीं मिलेगी। हमें लगा कि अब हमें अपने लिए कुछ करना चाहिए।



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